अमेरिकी सेना के पूर्व अधिकारी अहमद डेनियल की कूनूर में यादगार यात्रा

Agency:Local18

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Coonoor News: अमेरिकी अफसर अहमद डेनियल बर्थीन, जो इराक युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं, 29 साल बाद तमिलनाडु के कूनूर में अपने स्कूल के दिनों का अंडा पकोड़ा ढूंढने आए. उन्हें वही पुराना स्वाद मिला.

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अमेरिकी अफसर कूनूर में अंडा पकोड़ा की तलाश

हाइलाइट्स

  • अमेरिकी अफसर अहमद 29 साल बाद कूनूर लौटे.
  • अहमद ने कूनूर में पुराना अंडा पकोड़ा ढूंढा.
  • अहमद ने कहा, “आज भी वही स्वाद!”

कूनूर: कोई शख्स जो अमेरिका की सेना में बड़े ओहदे पर काम कर चुका हो, जिसने दो-दो बार इराक युद्ध में हिस्सा लिया हो और जिसने दुनिया के 25 से ज्यादा देशों की यात्रा की हो, वो अचानक एक मामूली से ठेले को ढूंढने निकल पड़े. जी हां, यही कहानी है अहमद डेनियल बर्थीन की, जो अपनी मां और भाई-बहनों के साथ हाल ही में कूनूर पहुंचे थे.

यादें 29 साल पीछे चली गईं
तमिलनाडु की कूनूर की गलियों में चलते हुए अहमद की यादें 29 साल पीछे चली गईं. उन्हें याद आया कि स्कूल के बाद जब वे माउंट प्लेजेंट ट्यूशन सेंटर जाते थे, तो वीपी स्ट्रीट की एक दुकान से अंडा पकोड़ा खरीदते थे. बस का किराया बचाकर पैदल चलने का मकसद भी यही था—अंडा पकोड़े का वो स्वाद, जो किसी जादू से कम नहीं था.

अब इतने सालों बाद जब वे फिर से कूनूर पहुंचे, तो उनके मन में वही स्वाद ताजा हो गया, लेकिन सवाल था—क्या वो दुकान अब भी है? क्या वही पकोड़ा अब भी बनता है? खोजबीन शुरू हुई और आखिरकार उषा फ्रैंकलिन के जरिए अहमद को उस अंडा पकोड़ा बनाने वाले शांता और चंद्रन मिल ही गए.

“आज भी वही स्वाद!”
फिर क्या था! अहमद ने उनसे वही 29 साल पुराना अंडा पकोड़ा बनाने की गुजारिश की. चंद्रन ने अपने पुराने अंदाज में पकोड़े तले और अहमद ने पहला कौर मुंह में डालते ही मुस्कुराकर कहा—”आज भी वही स्वाद!” ऐसा लगा मानो समय वहीं ठहर गया हो.

अंडा पकोड़ा आज भी अनमोल
इस मुलाकात में सिर्फ स्वाद नहीं, यादों की खुशबू भी घुली थी. अहमद ने बताया कि भले ही अब वे करोड़ों रुपये कमाते हैं, लेकिन स्कूल के दिनों का वो अंडा पकोड़ा आज भी उनके लिए अनमोल है. उन्होंने यह भी कहा कि जितना प्यार भारत में है, उतना कहीं नहीं देखा. कूनूर उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि यादों का खज़ाना है.

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अहमद ने स्टेंस स्कूल के छात्रों से भी मुलाकात की और उन्हें अपने अनुभव बताए और फिर, उस मिट्टी की खुशबू दिल में बसाए, वे आगे की यात्रा पर निकल पड़े.

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