नेल पेंट कराते ही कोमा में पहुंची बच्ची, मरते-मरते बची, पलभर में बदला मंजर, वजह हर किसी के लिए जाननी ज़रूरी

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5 साल की बच्ची अपनी मां से अपने नाखून पर पेंट लगवा रही थी और वे साथ में हंस-खेल रहे थे. इसी बीच अचानक उनकी सांस थमने लगी और बच्ची देखते-देखते मौत के मुंह में पहुंच गई. ये घटना हर किसी को जाननी ज़रूरी है क्योंकि…और पढ़ें

नेल पेंट कराते ही कोमा में पहुंची बच्ची, मरते-मरते बची, वजह जानना सबको जरूरी

मां से नेल पेंट करा रही थी बच्ची, पहुंची कोमा में.

एक ज़माना था, जब लोग समझते थे कि बच्चे तो बच्चे होते हैं. ये बीमार भी हो जाएं, तो झट से ठीक हो जाते हैं क्योंकि इनका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है. हालांकि अब ऐसा नहीं है क्योंकि बच्चों को ऐसी एलर्जी और बीमारियां भी हो रही हैं, जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते. कुछ ऐसा ही हुए एक पांच साल की बच्ची के साथ, जो हंसते-खेलते ही कोमा में पहुंच गई.

यूनाइटेड किंगडम की रहने वाली 5 साल की बच्ची एला अपनी मां से अपने नाखून पर पेंट लगवा रही थी और वे साथ में हंस-खेल रहे थे. इसी बीच अचानक उनकी सांस थमने लगी और बच्ची देखते-देखते मौत के मुंह में पहुंच गई. ये घटना हर किसी को जाननी ज़रूरी है क्योंकि ऐसा किसी के भी साथ हो सकता है. उसकी मां जेमा ग्रिफिंस अब सबसे अपील कर रही हैं कि इसके बारे में सभी को जानना चाहिए.

पेंट करा रही थी नेल्स, कोमा में पहुंच गई बच्ची!
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक ये घटना पिछले साल 26 अक्तूबर की है. पांच साल की एला में की मां इसके बारे में बताते हुए कहती हैं कि उनकी बेटी के नाखून पर वो पेंट लगा रही थीं और वे किसी जोक पर हंस रहे थे. इसी बीच अचानक उसकी सांस रुक गई और घबराई मां ने बच्ची को सीपीआर देना शुरू कर दिया. गनीमत ये थी कि उनके पड़ोसी एक पैरामेडिक थे, जिन्होंने उन्हें असिस्ट किया. इतने में एंबुलेंस आई और बच्ची को अस्पताल पहुंचाया गया. बच्ची तब तक कोमा में जा चुकी थी.

आखिर क्या हुआ था बच्ची को?
जेमा कहती हैं कि सीटी स्कैन से पता चला कि उनकी बच्ची को इतनी छोटी उम्र में कार्डिएक अरेस्ट हुआ था. इतना ही नहीं अस्पताल में एक महीने रहने के दौरान उसे दोबारा एक अरेस्ट और हुआ. डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को सीपीवीटी यानि Catecholaminergic Polymorphic Ventricular Tachycardia नाम की कंडीशन है, जो दिल की धड़कनों को प्रभावित करती है. भले ही बच्ची को महीनेभर बाद डिस्चार्ज कर दिया गया लेकिन उसकी एक सर्जरी अब भी होनी है और उसकी दिल की धड़कनों को एक मॉनिटर से लगातार देखना है. अब मां जेमा इस बीमारी को लेकर लोगों में जागरूकता फैला रही हैं और सर्जरी के लिए पैसे भी इकट्ठा कर रही हैं.

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