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23 साल की लूसी ने AI कंपनी को अपना चेहरा बेचकर 1,65,096 रुपये कमाए, लेकिन कांट्रैक्ट साइन करने के बाद पछताती रही. अब वह लोगों को चेतावनी दे रही है कि ऐसा न करें और कानूनी सलाह लें.

अपना चेहरा बेचकर लूसी को डेढ़ लाख रुपये मिले;
हाइलाइट्स
- लूसी ने AI कंपनी को चेहरा बेचकर 1,65,096 रुपये कमाए.
- कांट्रैक्ट साइन करने के बाद लूसी को पछतावा हुआ.
- लूसी अब लोगों को कानूनी सलाह लेने की चेतावनी दे रही है.
मैसेज एक AI कंपनी का था, जिसके बारे में लूसी ने पहले कभी नहीं सुना था. वे उससे उसके चेहरे को खरीदना चाहते थे ताकि उससे AI मॉडल बना सकें. लूसी को पहले तो अजीब लगा, लेकिन जब उसने थोड़ा सर्च किया तो लगा, अच्छी चीज है. क्योंकि केंडल जेनर जैसे कई स्टार ये काम कर रहे हैं. पैसा भी इतना मिला कि वह पलभर में लखपति हो गई. लेकिन फिर ऐसा राज खुला कि वह सन्न रह गई. अब लोगों को चेतावनी दे रही है कि प्लीज ऐसा न करें.
मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, AI कंपनी ने जब लूसी को अपना पूरा प्लान बताया तो उसे लगा कि यह पैसा कमाने का अच्छा तरीका है. जल्दी ही उसने कंपनी को अपना फेस यानी चेहरा बेच दिया. इसके लिए उसे तुरंत 1,500 पाउंड यानी 1,65,096 रुपये मिल गए. लेकिन कंपनी ने उससे एक कांट्रैक्ट साइन करवा लिया. अब आगे के कई विज्ञापनों में उसके चेहरे का इस्तेमाल होगा. इस पर कोई रोक नहीं होगी. लूसी ने कहा, आपका चेहरा लेकर वह कंपनी लाखों पाउंड कमाएगी, लेकिन आपको सिर्फ कुछ पैसे मिलेंगे. इसलिए कह रही हूं कि जब भी ऐसा कुछ ऑफर आए तो सोच समझकर फैसला लो. अपने फ्यूचर के बारे में सोचो. मुझे अपने फैसले पर बहुत पछतावा है. मुझे ये कांट्रैक्ट साइन करने से पहले कानूनी सलाह लेनी चाहिए थी. कम से कम अपने पेरेंट्स से बात करनी चाहिए थी. मैंने कभी आगे के बारे में नहीं सोचा, उस समय मुझे सिर्फ पैसे की पड़ी थी.
टेंशन किस बात की
ऐसा क्यों हो रहा है? क्योंकि ब्रांड असली इंसानों की तुलना में AI फेस इस्तेमाल कर बहुत कम पैसे में काम चला लेते हैं. इससे उनकी बचत ज्यादा होती है. लेकिन लूसी की किस्मत इतनी खराब थी कि कांट्रैक्ट साइन करने के अगले ही सरकार ने कहा कि हम एक ऐसा कानून लेकर आ रहे हैं कि बिना इजाजत के एआई मॉडल का कहीं भी इस्तेमाल नहीं हो पाएगा. आप जहां जहां इस्तेमाल करेंगे, आपको पैसा उस शख्स को देना होगा. लूसी ने कहा, जो पैसे मुझे मिले वो तो कुछ ही दिनों में खर्च हो गए, लेकिन मेरे चेहरे का कई ऐसी जगह भी इस्तेमाल किया गया, जो मुझे पसंद नहीं था. अब इसका मुझे पछतावा है.
असली और नकली में फर्क मुश्किल
AI की वजह से असली और नकली चेहरों में फर्क करना लगभग नामुमकिन हो गया है. सवाल ये है कि क्या इन AI कंपनियों को हमेशा के लिए किसी की नकल रखने की अनुमति दी जानी चाहिए? हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जहां AI को लगातार हमारे सामने इस तरह बेचा जाता है कि यह जीवन को आसान बना देगा, लेकिन किस हद तक? और कब ये सुविधा असली लोगों की कीमत पर आती है?
New Delhi,New Delhi,Delhi
February 28, 2025, 22:28 IST
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